बाल विकास विकास की अवधारणा विकास की अवधारणा विकास की प्रक्रिया एक अविरल क्रमिक तथा सतत प्रक्रिया होती है | विकास की प्रक्रिया में बालक का शारीरिक, क्रियात्मक, संज्ञानात्मक, भाषागत, संवेगात्मक एवं सामजिक विकास होता है | विकास की प्रक्रिया में रुचियों, आदतों, द्रष्टिकोकणों, जीवन-मूल्यों, स्वभाव, व्यक्तिगत, व्यवहार इत्यादि का विकास भी शामिल है | बल विकास का तात्पर्य- है- बालक के विकास की प्रकिया | बालक के विकास की प्रक्रिया उसके जन्म से पूर्व गर्भ में ही प्रारम्भ हो जाती है | विकास की इस प्रक्रिया में वः गर्भवस्था, शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रोढ़ावस्था इत्यादि कई अवस्थाओ से गुजरते हुए परिपक्वता की स्तिथि प्राप्त करता है | बल विकास के अध्ययन में प्राय: निम्नलिखित बातो को शामिल किया जाता है | जन्म लेने से पूर्व एवं जन्म लेने के बाद परिपक्व होने तक बालक में किस प्रकार के परिवर्तन होते है ? बालक में होने वाले परिवर्तनों का विशेष आयु के साथ क्या सम्बन्ध होता है ? आयु के साथ होने वाले परिवर्तनों का क्या स्वरूप होता है ? बालको में होने वाले उपरोक्त परिवर्तनों क...